Archive for September 3, 2016

दोहा

हरियाली का दायरा, घटकर हुआ न्यून.

शहरों में सजने लगे, कृत्रिम लता-प्रसून ..

– विजय तिवारी “किसलय”

अमृत घट छलकाते आये हैं बादल

अमृत- घट- छलकाते- आये- हैं- बादल

 [वर्तिका- की- काव्य-गोष्ठी- संपन्न]

 

विगत दिवस वर्तिका की काव्य गोष्ठी में अध्यक्षीय

उद्बोधन के साथ अपने गीत ‘अवनि से अम्बर तक छाये हैं

बादल, अमृत घट छलकाते आये हैं बादल’ को गुनगुनाकर

आचार्य भगवत दुबे ने गोष्ठी में चार चाँद  लगा दिए. वहीं

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पधारे श्री मोहन शशि

ने उत्तराखंड त्रासदी पर ‘अहंकार भरे पक्के निर्माण –

सह न सके लहरों के बाण’ जैसी पंक्तियों से श्रोताओं की

आँखें नम कर दीं. गोष्ठी के  प्रारम्भ में वर्तिका के समन्वक

श्री एम. एल. बहोरिया अनीस ने कार्यक्रमों को शास्वत

बनाये रखने का संकल्प दोहराते हुए स्व. साज़ को याद

किया.

 इस अवसर पर सुनीता मिश्रा सुनीत, अरविन्द यादव,

शेख निजामी, एवं गोपाल कोरी को उनके जन्म दिवस के

उपलक्ष्य में वर्तिका के इंजी. विवेक रंजन श्रीवास्तव,

विजय नेमा अनुज, सलमा जमाल सहित मंचासीन

अतिथियों द्वारा अभिनन्दन पत्र प्रदान कर सम्मानित

किया गया.

 काव्य गोष्ठी में राजेन्द्र रतन के – ऋतु के रूप सुहाने,
संजीव वर्मा सलिल के – बन बन कर मिटता है मानव,
मिट मिट कर हर बार बनेगा, मैराज जबलपुरी के –
शेरो-सुखन-सऊर का दफ्तर चला गया, श्रीमती शशिकला
सेन के गीत-  भूल गए सब अपने संस्कार, सोहन परौहा
सलिल की कविता- मैं उसकी भरपाई जनम जनम तक न
कर पाऊँगा, दीपक तिवारी की – फुटपाथ पर चलने वाले
जमींदार हो गए जैसी अभिव्यक्ति सुनकर लोग वाह वाह
कह उठे.  कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री शेख निजामी ने
जहाँ अपनी व्यंगात्मक शैली में सुनाया कि ‘कहते हुए वो
लोकसभा से चल दिए, सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है’
वहीं संस्था सचिव विजय तिवारी किसलय ने अपनी

रचना ‘बिन- सजना- के- कुछ- न- भाये’- सुनाई.

आज की गोष्ठी में मनोज शुक्ल मनोज, देवेन्द्र तिवारी रत्नेश,

इंद्र बहादुर श्रीवास्तव, प्रभा पण्डे पुरनम, अनूदित साज़,

प्रमोद तिवारी मुनि, प्रभा विश्वकर्मा शील, नारायण नामदेव,

ममता जबलपुरी, गुंजन भारती, सुभाष जैन शलभ, बसंत

सिंह ठाकुर, मनोहर शर्मा माया की रचनाओं ने भी अपनी

प्रतिनिधि रचनाओं से श्रोताओं को बांधे रखा.

अंत मेंअशोक श्रीवास्तव सिफ़र द्वारा अतिथियों के कर कमलों
से मासिक काव्य पटल का अनावरण कराया गया एवं
सुशील श्रीवास्तव ने सभी की उपस्थिति के प्रति आभार
व्यक्त किया.
प्रस्तुति:-

डॉ- विजय-

पत्रकारिता की स्वतन्त्रता पर कसता अवांछित शिकंजा

देश-काल-संस्कृति के अनुरूप पत्रकारिता के गुण, धर्म और कार्यशैली में परिवर्तन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, इसलिए वर्तमान एवं पूर्ववर्ती पत्रकारिता की तुलनात्मक समीक्षा औचित्यहीन होvkt-2_jpgnगी। पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य सामाजिक घटनाओं, अच्छाई-बुराई एवं दैनिक गतिविधियों का प्रकाशन कर समाज को सार्थक दिशा में आगे बढ़ाना है। सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक परम्पराओं तथा उनकी मूल भावनाओं से अवगत कराना पत्रकारिता का एक अंग है।  हमारे आसपास घटित घटनाओं, विशेष अवसरों, विभिन्न परिस्थितियों के साथ ही आपन्न विपत्तियों में सम्पादकीय आलेखों के माध्यम से सचेतक का अहम कार्य भी पत्रकारिता का माना जाता है।  वर्षा, ग्रीष्म और शरद की परवाह किए बिना विस्तृत जानकारी के साथ समाचारों का प्रस्तुतीकरण इनकी ईमानदारी और कर्त्तव्यनिष्ठा का ही परिणाम है जो हम रोज देखते और पढ़ते आ रहे हैं। अखबारों के माध्यम से उठाई गई आवाज पर हमारा समाज चिन्तन-मनन करता है, प्रतिक्रिया व्यक्त करता है। विश्व के महानतम परिवर्तन इसके उदाहरण हैं।

वर्तमान पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं से हम-आप सभी परिचित हैं। यदि खाली डेस्क पर बैठकर समाचारों का लेखन होता तो उनमें न ही प्रामाणिकता होती और न ही जीवन्तता। दर्द, खुशी और वास्तविकता का एहसास भी नहीं होता। प्रत्यक्षदर्शी पत्रकार की अभिव्यक्ति ही अपने अखबार के प्रति सामाजिक विश्वास पैदा कराती है।

  इन सबके बावजूद आज के पत्रकार को शासकीय-अशासकीय उच्चाधिकारियों, नेताओं और  दबंगों के दबाव में काम करने हेतु बाध्य किया जा रहा है, जो कि अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार पर शिकंजा कसने जैसा है। सामाजिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों की वास्तविक जानकारी के अभाव में खोखले समाचारों से अखबार नहीं चला करते। पत्रकारों का सहयोग न करना, वास्तविकता को प्रकाशित न होने देने के लिए दबाव बनाना, आयोजनों में प्रवेश की अनुमति न देना अथवा अड़ंगे लगाना तथा पत्रकारों से अभद्रता जैसी वारदातें आज आम हो चली हैं।  पत्रकारिता पर आघात और अपमान का यह खेल तथाकथित वर्ग में चलन का रूप ले रहा है। आज दबंगों के रोब से सहमे  पत्रकार स्वयं को असहाय महसूस करते हैं। दूसरों के लिए आवाज उठाने वाले स्वयं के लिए आन्दोलन, अनशन, बहिष्कार अथवा अन्याय के विरुद्ध मोर्चा खोलने को बाध्य होने लगेंगे तो क्या स्थिति बनेगी ?

 हमारे संविधान ने प्रत्येक भारतीय को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है। इस पर अंकुश लगाना अथवा दबाव डालना निश्चित रूप से हमारे  मौलिक अधिकारों का हनन ही है।  इन परिस्थितियों में अब जनतंत्र के सिपहसालारों को चिन्तन कर ऐसे प्रभावी कदम उठाने ही होंगे जिससे कोई भी पत्रकारिता की स्वतन्त्रता  पर अवांछित शिकंजा कसने की हिमाकत न करे अन्यथा इनकी मनमर्जी देश को अवनति के रसातल में पहुँचाकर छोड़ेगी। 

– विजय तिवारी ‘किसलय’

हमारी वाणी

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स्व.श्री हीरालाल गुप्त स्मृति समारोह सम्पन्न

२४ दिसम्बर १९९७ से   जारी श्री हीरालाल गुप्त  स्मृति समारोह का आयोजन  हीरालाल गुप्त  स्मृति समिति तथा  सव्यसाची कला ग्रुप  के तत्वावधान में  ड्रीमलैण्ड फ़नपार्क जबलपुर में दिनांक २४ दिसम्बर २०१२ को आयोजित किया गया.  कार्यक्रम की अध्यक्षता  पूर्व उप महाधिवक्ता उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश श्री आदर्श मुनि त्रिवेदी जी ने की जबकि  मुख्य अतिथि के रूप में  श्री कृष्ण कान्त चतुर्वेदी पूर्व निदेशक कालिदास अकादमी ,मध्य प्रदेश  थे.   “स्वर्गीय हीरा लाल गुप्त स्मृति पत्रकारिता सम्मान ” से इस वर्ष वरिष्ठ पत्रकार श्री चैतन्य भट्ट को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, साहित्यकार, पत्रकार उपस्थित थे. सव्यसाची स्वर्गीया श्रीमती प्रमिला बिल्लोरे स्मृति सम्मान से इस बार संस्कारधानी  के जाने माने उद्घोषकराष्ट्र स्तरीय सामाजिक पत्रिका “सनाढ्य संगम” के यशस्वी संपादक  श्री राजेश पाठक “प्रवीण” को नवाजा गयासंस्कारधानी की भावना के अनुरूप इस कार्यक्रम में हम स्वर्गीय रामेश्वर गुरु जी को भी स्मरण किया जाना इस कार्यक्रम की  विशेषता थी. श्री श्याम बिहारी चतुर्वेदी ने स्व. रामेश्वर गुरु जी व्यक्तित्व पर विचार व्यक्त किये.
           कार्यक्रम के आरम्भ में दिवंगत मां सव्यसाची प्रमिला देवी बिल्लोरे एवम स्वर्गीय हीरालाल गुप्त मधुकर जी के चित्रों पर पुष्पांजली अतिथियों एवम उपस्थित व्यक्तियों द्वारा किया .   

कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ट पत्रकार मोहनशशि की अभिव्यक्ति से हुई जिन्होने जबलपुर में स्व. हीरालल गुप्ता जी की समकालीन पत्रकारिता में पवित्रतासादगीव्यापक विचारशीलता को रेखांकित किया.     इस अवसर पर सृजन सम्मान से सम्मानित श्री अमरेंद्र नारायण पूर्व सेक्रेट्री जनरल एसिया पेसिफ़िक टेक्नोकम्यूनिटि ने कहा –“बरसों देसी-विदेशी भूमि पर सेवा देने के बाद मुझे जबलपुर में वापसी को जबलपुर ने जिस तरह स्वीकारा है उसे उससे स्पष्ट हो जाता है कि जबलपुर वास्तव में अपने संस्कारधानी नाम के अनुरूप संस्कारवान है और रहेगी भी  स्व. श्री हीरालाल गुप्त मधुकर स्मृति पत्रकारिता सम्मान से समादरित श्री चैतन्य भट्ट ने प्राप्त सम्मान को गरिमामय सम्मान निरूपित करते हुए कहा कि  अदभुत चरित्र के धनी थे स्व. गुप्त जी उनका सानिध्य मात्र से सादगी और सच्चरित्र होना स्वभाविक था.  अध्यक्षीय उदबोधन में श्री आदर्श मुनि त्रिवेदी ने कहा-संस्कारवान पीढ़ी्यां ही अपने पूर्वजों की स्मृतियां अक्षुण्य रखतीं हैं. जबलपुर की तासीर भी यही है. इस तरह के आयोजनों से उन  आदर्शों की प्राण-प्रतिष्ठा को कायम किया जा सकता जो सामाजिक समरसता को जीवित रखते हैं. मां सव्यसाची प्रमिला देवी बिल्लोरे स्मृति सम्मान से सम्मानित श्री राजेश पाठकप्रवीण ने कहा- मेरे जीवन का मार्मिक क्षण है जबकि मुझे मेरी मां का स्नेह मिल रहा है.  कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत श्री सतीष बिल्लोरेश्री अरविंद गुप्ता  डा. विजय तिवारी किसलयबसंत मिश्राराजीव गुप्ता,श्री राजकुमार अग्रवाल ने किया. कार्यक्रम का संचालन गिरीश बिल्लोरे ने तथा आभार अभिव्यक्ति श्री विजय तिवारी “किसलय” द्वारा की गई

कर्यक्रम में  “स्वर्गीय हीरा लाल गुप्त स्मृति पत्रकारिता सम्मान ” से वरिष्ठ पत्रकार श्री चैतन्य भट्ट को सम्मानित किये जाते समय  की  झलक देख्नने हेतु इस लिंक को क्लिक करें-vHw5MdolkJA

दोहे

किसलय जग में श्रेष्ठ है, मानवता का धर्म.                                                                          अहम त्यागकर जानिये, इसका व्यापक मर्म…. 

– विजय तिवारी ‘किसलय’

चन्द्र भाल स्तोत्र

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आज दिनांक ०५ नवम्बर २०१३ की पूर्वान्ह मध्य प्रदेश विधान सभा के वर्तमान अध्यक्ष श्री ईश्वर दास रोहाणी का निधन.

आजदिनांक ०५ नवम्बर २०१३ की पूर्वान्ह संस्कारधानी जबलपुर के लब्धप्रतिष्ठित, मध्य प्रदेश विधान सभा के वर्तमान यशस्वी अध्यक्ष, चिन्तक एवंमितभाषी श्री ईश्वर दास रोहाणी का हृदयगति अवरुद्ध होनेसे निधन हो गया.संस्कार धानी का एक चमकता सितारा डूब गया. सारा जबलपुर शोक मग्न है. मैं भीव्यक्तिगत रूप से दुखी हूँ. ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे औरअपने चरणों में स्थान दे-

डॉ. विजय तिवारी “किसलय” , जबलपुर

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साहित्य रत्न डॉ. विजय तिवारी ‘किसलय’ ४ फ़र.१४ को “धर्मनिष्ठ समाजसेवी दालचंद सराफ स्मृति सरस्वती अलंकरण” से सम्मानित होंगे.

मानस साहित्य परिषद् गुंजन कला सदन, महिला प्रकोष्ठ गुंजन कला सदन जबलपुर के तत्वावधान में दिनांक ०४ फरवरी २०१४ को प्रातः ०९ बजे से ११ बजे तक पूजन, आरती एवं हवन तत्पश्चात प्रातः ११ बजे से १२ बजे दोपहर तक सरस्वती अलंकरण समारोह शक्ति मंच, ड्रीम लेंड फन पार्क , सिविक सेण्टर जबलपुर में आयोजित है.

अलंकरण समारोह का आमंत्रण पत्र.

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जिसमें “वर्तिका संस्था जबलपुर ” के महासचिव साहित्य रत्न डॉ. विजय तिवारी ‘किसलय’ को “धर्मनिष्ठ  समाजसेवी दालचंद सराफ स्मृति सरस्वती अलंकरण” से सम्मानित किया जाएगा.समारोह में आत्मीय, साहित्यानुरागी-मित्रगण आमंत्रित हैं

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