तड़पती केन – केदारनाथ अग्रवाल | हिन्दी कविता
तड़पती केन- केदरानाथ अग्रवाल की कविता- गरम रेट पर, जैसे बिजली......, बीच अधर में घन से छूटी..........., तड़प रही है ........
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February 12, 2026
तड़पती केन- केदरानाथ अग्रवाल की कविता- गरम रेट पर, जैसे बिजली......, बीच अधर में घन से छूटी..........., तड़प रही है ........
चंदनवा चैती गाता है- केदरानाथ अग्रवाल की कविता- घरवाली के साथ ओसाया,.. है समीर में।....दाने के ऊँचे पहाड़ को.... खड़ा किया है...
बसंती हवा- केदारनाथ अग्रवाल की कविता- हवा हूँ, बड़ी बावली हूँ!.....बड़ी मस्तमौला, नहीं कुछ फ़िकर है,,,..बड़ी ही निडर हूँ, जिधर चाहती हूँ,....
दोनों हाथों में रेती है,...नीचे, अगल-बग़ल रेती है,...होड़ राज्य-श्री से लेती है.......मोद मुझे रेती देती है
जल का जहाज़ जैसे पल-पल डोलता ........माँझी! न बजाओ बंशी मेरा प्रन टूटता......
फागुन की मस्ती के झोंके, .....दौड़े आते हैं उड़-उड़ के,...... अंगों में, बाहों में कस के,..............उसकी मति को मंद बनाने;