बैठा हूँ इस केन किनारे – केदारनाथ अग्रवाल | हिन्दी कविता
दोनों हाथों में रेती है,...नीचे, अगल-बग़ल रेती है,...होड़ राज्य-श्री से लेती है.......मोद मुझे रेती देती है
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February 12, 2026
दोनों हाथों में रेती है,...नीचे, अगल-बग़ल रेती है,...होड़ राज्य-श्री से लेती है.......मोद मुझे रेती देती है
हिन्दी कवियों का एक वृत्त-संग्रह ठाकुर शिवसिंह सेंगर ने सन् 1883 ईसवी में प्रस्तुत किया था। उसके पीछे सन् 1889 में डॉक्टर (अब सर) ग्रियर्सन ने ‘Modern Vernacular Literature Of Northen Hindustan’ के नाम से एक वैसा ही बड़ा कवि-वृत्त-संग्रह निकाला।