भारतेन्दु हरिश्चंद – आचार्य रामचंद्र शुक्ल | हिन्दी निबंध

Bhartendu Harishchand- हिंदी-गद्य साहित्य का सूत्रपात करने वाले चार महानुभाव कहे जाते हैं—मुंशी सदासुखलाल, इंशा अल्ला ख़ाँ, लल्लूलाल और सदल...

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तुलसी का भक्ति मार्ग – आचार्य रामचंद्र शुक्ल | हिन्दी निबंध

भक्ति रस का पूर्ण परिपाक जैसा तुलसीदासजी में देखा जाता है वैसा अन्यत्र नहीं। भक्ति में प्रेम के अतिरिक्त आलंबन के महत्त्व और ......

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कविता क्या है? – आचार्य रामचन्द्र शुक्ल | हिन्दी निबंध

मनुष्य अपने भावों, विचारों और व्यापारों के लिए दिए दूसरों के भावों, विचारों और व्यापारों के साथ कहीं मिलता और कहीं लड़ाता हुआ...

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हिन्‍दी साहित्‍य का इतिहास | प्रस्‍तावना | आचार्य रामचन्‍द्र शुक्‍ल

हिन्दी कवियों का एक वृत्त-संग्रह ठाकुर शिवसिंह सेंगर ने सन् 1883 ईसवी में प्रस्तुत किया था। उसके पीछे सन् 1889 में डॉक्टर (अब सर) ग्रियर्सन ने ‘Modern Vernacular Literature Of Northen Hindustan’ के नाम से एक वैसा ही बड़ा कवि-वृत्त-संग्रह निकाला।

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