परिंदे – निर्मल वर्मा | हिन्‍दी कहानी

Parinde- अँधियारे गलियारे में चलते हुए लतिका ठिठक गई। दीवार का सहारा लेकर उसने लैंप की बत्ती बढ़ा दी। सीढ़ियों पर उसकी छाया एक बेडौल

0 Comments

राजा निरबंसिया – कमलेश्वर | हिन्दी कहानी

Raja nirbansiya - ''एक राजा निरबंसिया थे”—माँ कहानी सुनाया करती थीं। उनके आसपास ही चार-पाँच बच्चे अपनी मुठ्ठियों में फूल दबाए कहानी समा

0 Comments

पिता – ज्ञानरंजन | हिन्दी कहानी

Pita - उसने अपने बिस्तरे का अंदाज़ लेने के लिए मात्र आध पल को बिजली जलाई। बिस्तरे फ़र्श पर बिछे हुए थे। उसकी स्त्री ने सोते-सोते ही बड़बड़ाया..

0 Comments

इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर – हरिशंकर परसाई | हिन्दी कहानी

Inspector Matadeen Chand Par-वैज्ञानिक कहते हैं, चाँद पर जीवन नहीं है। सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर मातादीन (डिपार्टमेंट में एम. डी. साब)....

0 Comments

सिक्का बदल गया – कृष्णा सोबती | हिन्दी कहानी

Sikka Badal Gaya Kahani- खद्दर की चादर ओढ़े, हाथ में माला लिए शाहनी जब दरिया के किनारे पहुँची तो पौ फट रही थी। दूर-दूर आसमान के पर्दे....

0 Comments

चीफ़ की दावत – भीष्म साहनी | हिन्दी कहानी

Chief Ki Dawat- आज मिस्टर शामनाथ के घर चीफ़ की दावत थी। शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फ़ुर्सत न थी..

0 Comments

अमृतसर आ गया – भीष्म साहनी | हिन्दी कहानी

Amritsar Aa Gaya गाड़ी के डिब्बे में बहुत मुसाफ़िर नहीं थे। मेरे सामने वाली सीट पर बैठे सरदारजी देर से मुझे लाम के क़िस्से सुनाते रहे थे..

0 Comments

कोसी का घटवार – शेखर जोशी | हिन्‍दी कहानी

Kosi Ka Ghatwar गुसाईं का मन चिलम में भी नहीं लगा। मिहल की छाँह से उठकर वह फिर एक बार घट (पनचक्की) के अंदर आया। अभी खप्पर में एक-चौथाई से भी

0 Comments

गैंग्रीन (रोज़) – अज्ञेय | हिन्दी कहानी

Gaingreen Kahani- दोपहर में उस सूने आँगन में पैर रखते हुए मुझे ऐसा जान पड़ा, मानो उस पर किसी शाप की छाया मँडरा रही हो, उसके वातावरण में

0 Comments

लाल पान की बेग़म – फणीश्वर नाथ रेणु | हिन्दी कहानी

क्यों बिरजू की माँ, नाच देखने नहीं जाएगी क्या? बिरजू की माँ शकरकंद उबाल कर बैठी मन-ही-मन कुढ़ रही थी अपने आँगन में। सात साल का लड़का बिरजू

0 Comments