भारतेन्दु हरिश्चंद – आचार्य रामचंद्र शुक्ल | हिन्दी निबंध

Bhartendu Harishchand- हिंदी-गद्य साहित्य का सूत्रपात करने वाले चार महानुभाव कहे जाते हैं—मुंशी सदासुखलाल, इंशा अल्ला ख़ाँ, लल्लूलाल और सदल...

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तुलसी का भक्ति मार्ग – आचार्य रामचंद्र शुक्ल | हिन्दी निबंध

भक्ति रस का पूर्ण परिपाक जैसा तुलसीदासजी में देखा जाता है वैसा अन्यत्र नहीं। भक्ति में प्रेम के अतिरिक्त आलंबन के महत्त्व और ......

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कविता क्या है? – आचार्य रामचन्द्र शुक्ल | हिन्दी निबंध

मनुष्य अपने भावों, विचारों और व्यापारों के लिए दिए दूसरों के भावों, विचारों और व्यापारों के साथ कहीं मिलता और कहीं लड़ाता हुआ...

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दिल्ली दरबार दर्पण – भारतेन्दु हरिश्चंद | हिन्दी निबंध

सब राजाओं की मुलाक़ातों का हाल अलग-अलग लिखना आवश्यक नहीं, क्योंकि सबके साथ वही मामूली बातें हुईं। सब बड़े-बड़े.....

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भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है – भारतेन्दु हरिश्चंद | हिन्दी निबंध

आज बड़े आनंद का दिन है कि छोटे-से नगर बलिया में हम इतने मनुष्यों को एक बड़े उत्साह से एक स्थान पर देखते हैं। इस अभागे......

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मेरे राम का मुकुट भीग रहा है – विद्या निवास मिश्र | हिन्दी निबंध

महीनों से मन बेहद-बेहद उदास है। उदासी की कोई ख़ास वजह नहीं, कुछ तबीयत ढीली, कुछ आसपास के तनाव और कुछ उनसे टूटने का डर...

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उत्तराफाल्गुनी के आसपास – कुबेर नाथ राय | हिन्दी निबंध

वर्षा ऋतु की अंतिम नक्षत्र है उत्तराफाल्गुनी। हमारे जीवन में गदह-पचीसी सावन-मनभावन है, बड़ी मौज रहती है, परंतु सत्ताइसवें के आते-आते.....

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