अगम बहै दरियाव की पुस्‍तकीय समीक्षा | शिवमूर्ति | हिन्‍दी उपन्‍यास

अगम बहै दरियाव- समकालीन ग्रामीण जीवन के सशक्त और यथार्थ गाथा को साहित्य में बड़े ही बारीकी से पिरोने वाले ग्रामीण चेतना के लेखक शिवमूर्ति ने

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परिंदे – निर्मल वर्मा | हिन्‍दी कहानी

Parinde- अँधियारे गलियारे में चलते हुए लतिका ठिठक गई। दीवार का सहारा लेकर उसने लैंप की बत्ती बढ़ा दी। सीढ़ियों पर उसकी छाया एक बेडौल

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राजा निरबंसिया – कमलेश्वर | हिन्दी कहानी

Raja nirbansiya - ''एक राजा निरबंसिया थे”—माँ कहानी सुनाया करती थीं। उनके आसपास ही चार-पाँच बच्चे अपनी मुठ्ठियों में फूल दबाए कहानी समा

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पिता – ज्ञानरंजन | हिन्दी कहानी

Pita - उसने अपने बिस्तरे का अंदाज़ लेने के लिए मात्र आध पल को बिजली जलाई। बिस्तरे फ़र्श पर बिछे हुए थे। उसकी स्त्री ने सोते-सोते ही बड़बड़ाया..

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इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर – हरिशंकर परसाई | हिन्दी कहानी

Inspector Matadeen Chand Par-वैज्ञानिक कहते हैं, चाँद पर जीवन नहीं है। सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर मातादीन (डिपार्टमेंट में एम. डी. साब)....

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सिक्का बदल गया – कृष्णा सोबती | हिन्दी कहानी

Sikka Badal Gaya Kahani- खद्दर की चादर ओढ़े, हाथ में माला लिए शाहनी जब दरिया के किनारे पहुँची तो पौ फट रही थी। दूर-दूर आसमान के पर्दे....

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चीफ़ की दावत – भीष्म साहनी | हिन्दी कहानी

Chief Ki Dawat- आज मिस्टर शामनाथ के घर चीफ़ की दावत थी। शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फ़ुर्सत न थी..

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अमृतसर आ गया – भीष्म साहनी | हिन्दी कहानी

Amritsar Aa Gaya गाड़ी के डिब्बे में बहुत मुसाफ़िर नहीं थे। मेरे सामने वाली सीट पर बैठे सरदारजी देर से मुझे लाम के क़िस्से सुनाते रहे थे..

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