उठ-उठ री लघु-लघु लोल लहर – जयशंकर प्रसाद | हिन्दी कविता
मलयानिल की परछाईं-सी,.....इस सूखे तट पर छिटक छहर!... कोमल चिर कंपन-सी......
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February 12, 2026
मलयानिल की परछाईं-सी,.....इस सूखे तट पर छिटक छहर!... कोमल चिर कंपन-सी......
उषा-सी आँखों में कितनी, मादकता भरी ललाई है।....... कहता दिगंत से मलय पवन...............है रात घूम आई मधुबन,......
सामने जल-राशि का रजत शृंगार था। वरुण बालिकाओं के लिए लहरों से हीरे और नीलम की क्रीड़ा शैल-मालाएँ बन रही थीं और वे मायाविनी छलनाएँ अपनी