आचार्य रामचन्‍द्र शुक्‍ल साहित्‍‍य‍ेतिहास प्रश्नोत्तरी सीरिज | आदिकाल (प्रकरण 1)

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आचार्य रामचन्‍द्र शुक्‍ल साहित्‍‍य‍ेतिहास प्रश्नोत्तरी सीरिज | आदिकाल (प्रकरण 1- सामान्‍य परिचय)

! महत्त्वपूर्ण  सूचना !

यह अभ्‍यास-पत्र हिन्‍दी साहित्‍येतिहास जगत मेंं प्रमुख ख्‍याति प्राप्‍त साहित्‍यकार आचार्य रामचन्‍द्र शुक्‍ल के ग्रंथ 'हिन्‍दी साहित्‍य इतिहास' पर आधारित है।

इस अभ्‍यास-पत्र को आगामी परीक्षाओं के अभ्‍यास के लिए यहॉं निशुल्‍क उपलब्‍ध करवाया जा रहा है।

आगे भी हिन्‍दी भाषा से संबंधित विभिन्‍न परीक्षाओं के पिछले वर्षों के प्रश्‍न-पत्र एवं अभ्‍यास प्रश्‍न उपलब्‍ध करवाऍं जाएँँगे, जिसकी सूचना अभ्‍यर्थी द्वारा दी गई ई-मेल आईडी पर मुहैया करवाई जाएगी । अत: आधिकारिक नाम तथा ई-मेल आईडी से ही इस प्रश्नोत्तरी में स‍म्मिलित हों।

हालांकि प्रश्‍न-पत्र तैयार करते समय बड़ी सावधानी बरती गई है तथा त्रुटि की गुंजाइश बहुत कम है, फिर भी अगर कोई त्रुटि हो तो वेबसाईट पर मौजूद आधिकारिक ई-मेल आईडी से अवगत करवाने का कष्‍ट करें।

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शुक्ल जी ने आदिकाल के अंतर्गत 'अपभ्रंश काव्य' में कितने ग्रंथों को साहित्यिक मानते हुए शामिल किया है?

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विद्यापति ने अपने समय की बोलचाल की भाषा को क्या नाम दिया, जिससे प्रेरित होकर शुक्ल जी ने 'देशभाषा' शब्द का प्रयोग किया?

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शुक्ल जी द्वारा निर्दिष्ट आदिकाल की दो मूल विशेषताएँ निम्नलिखित में से कौन सी हैं?

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शुक्ल जी ने अपभ्रंश के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग अपने इतिहास ग्रंथ में किया है?

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शुक्ल जी ने आदिकाल का नाम 'वीरगाथाकाल' रखते समय किन दो ग्रंथों को छोड़कर शेष सभी ग्रंथों को वीरगाथात्मक माना है?

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निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रंथ शुक्ल जी के अनुसार आदिकाल के 'अपभ्रंश काव्य' के अंतर्गत नहीं आता है?

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शुक्ल जी के अनुसार 'गाथा' या 'गाहा' कहने से किस भाषा का बोध होता था?

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आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार हिंदी साहित्य का आदिकाल का समय कब से कब तक माना जा सकता है?

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भाषिक-वैविध्य की स्थिति में अपभ्रंश की परंपरा विक्रम की किस शताब्दी के मध्य (विद्यापति के समय) तक चलती रही?

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प्राकृत की अंतिम अपभ्रंश अवस्था से ही हिंदी साहित्य का आविर्भाव मानने वाले इतिहासकार कौन हैं?ं

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"बोलचाल की भाषा घिस-घिसकर बिल्कुल जिस रूप में आ गई थी सारा वही रूप न लेकर कवि और चारण आदि भाषा का बहुत कुछ वह रूप व्यवहार में लाते थे जो उनसे सौ वर्ष पहले से कवि परंपरा रखती चली आती थी।" यह कथन शुक्ल जी ने किस संदर्भ में कहा है?

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राहुल सांकृत्यायन के अनुसार प्रथम सिद्ध 'सरहपा' का समय क्या माना गया है?

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आदिकालीन रचनाओं में देशभाषा (बोलचाल की भाषा) के जो दो रूप मिलते हैं, उनमें से कौन सा रूप प्राकृत की रूढ़ियों से बहुत कुछ मुक्त था?

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विक्रम की 14वीं शताब्दी के मध्य में एक ही समय में कौन से दो कवि क्रमशः अपभ्रंश और देशभाषा (खड़ी बोली) का प्रयोग कर रहे थे?

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आदिकाल के प्रकरण 1 (सामान्य परिचय) में मुख्य रूप से किसका वर्णन किया गया है?

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"इस काल की जो साहित्यिक सामग्री प्राप्त है, उसमें कुछ तो असंदिग्ध है और कुछ संदिग्ध है। असंदिग्ध सामग्री जो कुछ प्राप्त है, उसकी भाषा अपभ्रंश अर्थात् ___ है।" रिक्त स्थान भरें

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प्राकृत भाषा की कितनी अवस्थाएँ मानी जाती हैं और अपभ्रंश कौन सी अवस्था है?

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शिवसिंह सरोज के अनुसार, संवत् 770 में भोज के पूर्वपुरुष राजा मान के सभासद किस बंदीजन ने दोहों में एक अलंकार ग्रंथ लिखा था, जिसका कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है?

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विद्यापति की प्रसिद्ध रचना 'पदावली' किस भाषा में रचित है, जिसे शुक्ल जी ने देशभाषा के अंतर्गत रखा है?

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शुक्ल जी ने आदिकाल का नामकरण 'वीरगाथाकाल' कुल कितने ग्रंथों को साहित्यिक मानते हुए उनके आधार पर किया है?

नई प्रश्नोत्तरी के नोटिफिकेशन तथा परिणाम के लिए नीचे दिए गए फ़ॉर्म को भरें। कृपया आधिकारिक नाम तथा ई-मेल आईडी ही दर्ज करें।

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