0% 0 votes, 0 avg 4 समाप्त हो गया है। Created by Hindi Sahitya Sangamआचार्य रामचन्द्र शुक्ल साहित्येतिहास प्रश्नोत्तरी सीरीज | आदिकाल (प्रकरण 3 - देशभाषा काव्य)! महत्त्वपूर्ण सूचना !यह अभ्यास-पत्र हिन्दी साहित्येतिहास जगत के प्रमुख इतिहासकार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के ग्रंथ 'हिन्दी साहित्य इतिहास' पर आधारित है।इस अभ्यास-पत्र को आगामी परीक्षाओं के अभ्यास के लिए यहॉं निशुल्क उपलब्ध करवाया जा रहा है।आगे भी हिन्दी भाषा से संबंधित विभिन्न परीक्षाओं के पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र एवं अभ्यास प्रश्न उपलब्ध करवाऍं जाएँँगे, जिसकी सूचना अभ्यर्थी द्वारा दी गई ई-मेल आईडी पर मुहैया करवाई जाएगी । अत: आधिकारिक नाम तथा ई-मेल आईडी से ही इस प्रश्नोत्तरी में सम्मिलित हों।हालांकि प्रश्न-पत्र तैयार करते समय बड़ी सावधानी बरती गई है तथा त्रुटि की गुंजाइश बहुत कम है, फिर भी अगर कोई त्रुटि हो तो वेबसाईट पर मौजूद आधिकारिक ई-मेल आईडी से अवगत करवाने का कष्ट करें। 1 / 261. "ये (चंदबरदाई) हिंदी के प्रथम महाकवि माने जाते हैं और इनका 'पृथ्वीराजरासो' हिंदी का प्रथम महाकाव्य है।" यह पंक्ति शुक्ल जी के इतिहास में किस रासो काव्य की शुरुआत में आती है? 1. परमालरासो 2. पृथ्वीराजरासो 3. खुमानरासो 4. हम्मीररासोचंदबरदाई राजा पृथ्वीराज चौहान के अंतरंग सखा, दरबारी कवि और सामंत थे। शुक्ल जी ने चंदबरदाई को हिंदी साहित्य का पहला महाकवि घोषित किया है। 2 / 262. 'पृथ्वीराज विजय' के लेखक कश्मीरी कवि 'जयानक' ने पृथ्वीराज के मुख्य भाट या बंदिराज का क्या नाम लिखा है, जिसे चंदबरदाई का ही दूसरा नाम माना जाता है? 1. पृथ्वीभट्ट 2. चंदकुँवर 3. जल्हण कवि 4. भोजराजजयानक कृत प्रामाणिक इतिहास ग्रंथ 'पृथ्वीराज विजय' में चंदबरदाई का नाम 'पृथ्वीभट्ट' मिलता है, जिससे चंद की ऐतिहासिकता तो सिद्ध होती है, पर रासो की कथाएँ इतिहास से मेल नहीं खातीं। 3 / 263. "राजाश्रित कवि और चारण जिस प्रकार नीति, श्रृंगार आदि के फुटकल दोहे राजसभाओं में सुनाया करते थे, उसी प्रकार अपने आश्रयदाता राजाओं के पराक्रमपूर्ण चरितों या गाथाओं का वर्णन भी किया करते थे। यही प्रबंध परंपरा 'रासो' के नाम से पाई जाती है।" यह कथन किसका है? 1. हजारी प्रसाद द्विवेदी 2. रामचंद्र शुक्ल 3. डॉ. नगेंद्र 4. मिश्र बंधुशुक्ल जी ने यहाँ 'रासो' शब्द की साहित्यिक उत्पत्ति और चारण कवियों की काव्य-परंपरा के अंतर्संबंधों को स्पष्ट किया है। 4 / 264. "रासो काव्य के प्रायः सभी ग्रंथों की सामग्री की प्रामाणिकता कैसी है?" शुक्ल जी के अनुसार वाक्य पूर्ण करें 1. पूर्णतः प्रामाणिक और अकाट्य है 2. संदिग्ध है; कुछ ग्रंथ तो अप्राप्य हैं और जो प्राप्त हैं उनमें बहुत-सा हिस्सा बाद का जोड़ा हुआ मालूम पड़ता है 3. पूरी तरह आधुनिक काल की रचनाएँ हैं 4. विदेशी विद्वानों द्वारा लिखी गई हैंशुक्ल जी ने रासो काव्यों (विशेषकर पृथ्वीराजरासो और बीसलदेवरासो) के पाठ को बहुत हद तक प्रक्षिप्त (बाद में जोड़ा हुआ) माना है, जिससे उनकी ऐतिहासिकता संदिग्ध हो जाती है। 5 / 265. "बुंदेलखंड में विशेषतः महोबे के आसपास आल्हा-खंड के गाने वाले बहुत मिलते हैं। इन गीतों के समुच्चय को सर्वसाधारण क्या कहते हैं?" 1. वीरगाथा 2. आल्हा 3. रासो गीत 4. कड़वकवर्षा ऋतु में उत्तर भारत के गाँवों में 'आल्हा' गाने की एक बहुत बड़ी लोक-परंपरा है। यह वीर रस से ओतप्रोत मुक्तक गीत शैली है। 6 / 266. 'पृथ्वीराजरासो' में राजपूतों की उत्पत्ति कहाँ से बताई गई है, जिसका वर्णन ग्रंथ में विस्तार से है? 1. सूर्यवंश से 2. चंद्रवंश से 3. आबू के यज्ञकुंड से 4. समुद्र सेरासो के अनुसार, जब म्लेच्छों के अत्याचार बढ़े तो वशिष्ठ आदि मुनियों ने आबू पर्वत पर यज्ञ किया, जिसके अग्निकुंड से परिहार, परमार, सोलंकी और चौहानों की उत्पत्ति हुई। 7 / 267. 'जयचंदप्रकाश' और 'जयमयंक जस चंद्रिका' ग्रंथ जो वर्तमान में केवल सूचना मात्र हैं (उपलब्ध नहीं हैं), इनके रचनाकार क्रमशः कौन हैं? 1. जगनिक और चंदबरदाई 2. विद्यापति और अमीर खुसरो 3. शारंगधर और हेमचंद्र 4. भट्ट केदार और मधुकर कविभट्ट केदार ने 'जयचंदप्रकाश' लिखा था और मधुकर कवि ने 'जयमयंक जस चंद्रिका'। इन ग्रंथों में कन्नौज के राजा जयचंद के प्रताप और वीरता का वर्णन था, जिसका उल्लेख दयालदास सिंघायच कृत 'राठौड़ां री ख्यात' में मिलता है। 8 / 268. 'बीसलदेवरासो' में राजा बीसलदेव (विग्रहराज चतुर्थ) के समसामयिक किस राजा की कन्या 'राजमती' का उल्लेख है, जो ऐतिहासिक रूप से बीसलदेव से लगभग 100 वर्ष पहले ही दिवंगत हो चुके थे? 1. कन्नौज के जयचंद 2. धार के प्रसिद्ध परमार राजा भोज 3. पृथ्वीराज चौहान 4. महाराज हम्मीरऐतिहासिक दृष्टि से राजा भोज और बीसलदेव का काल अलग-अलग है। इसलिए शुक्ल जी कहते हैं कि कवि ने केवल नाम का आकर्षण देखकर राजा भोज को राजमती का पिता कल्पित कर लिया है, जो इतिहास सम्मत नहीं है। 9 / 269. जब शहाबुद्दीन गोरी पृथ्वीराज को कैद करके गजनी ले गया, तब चंदबरदाई ने अपने किस पुत्र के हाथ में रासो की पुस्तक सौंपकर उसे पूरा करने का संकेत किया था? 1. गोविंदराज 2. जल्हण 3. हरिराज 4. कल्हणइसके लिए प्रसिद्ध छंद है: "पुस्तक जल्हण हत्थ दै चलि गज्जन नृप-काज। रघुनाथचरित हनुमंतकृत भूप भोज उद्धरिय जिमि।।" 10 / 2610. वीरगाथाकालीन काव्यों में राजाओं के युद्धों का मूल कारण प्रायः किसे कल्पित करके रचनाएँ की जाती थीं? 1. किसी रूपवती स्त्री को 2. केवल भूमि और धन को 3. धार्मिक मतभेदों को 4. विदेशी आक्रमणकारियों की नीतियों कोइन चारण काव्यों की एक बड़ी विशेषता थी कि इनमें युद्ध का कारण अक्सर किसी राजकुमारी या सुंदरी से विवाह की इच्छा या उससे जुड़ा विवाद दिखाया जाता था (वीर रस के साथ श्रृंगार का पुट)। जैसे शहाबुद्दीन के यहाँ से रूपवती स्त्री का पृथ्वीराज के यहाँ आना 11 / 2611. ''मंहल पलाण्यो तॉंजदीन। खुरसाणा चढ़ि चाल्यो गोंड।।''उपर्युक्त पंक्ति किस रासो ग्रंथ से संबंधित है? 1. परमालरासो 2. पृथ्वीराजरासो 3. खुमाण रासो 4. बीसलदेव रासोबीसलदेव के सरदारों में ताजुद्दीन मियॉं का जिक्र है। 12 / 2612. रायबहादुर पंडित गौरीशंकर हीराचंद ओझा 'बीसलदेवरासो' को किस राजा के समय की रचना मानते हैं? 1. पृथ्वीराज के समय की 2. महाराज हम्मीर के समय की 3. राजा भोज के समय की 4. कुमारपाल के समय कीओझा जी का मानना था कि भाषा और भाषा-शैली को देखते हुए यह ग्रंथ हम्मीर देव के समय के आसपास (14वीं शती) लिखा गया होगा, न कि बीसलदेव के अपने समय में। 13 / 2613. शुक्ल जी ने अंततः 'पृथ्वीराजरासो' को ऐतिहासिक प्रामाणिकता की कसौटी पर कसते हुए क्या घोषित किया है? 1. पूर्णतः प्रामाणिक ग्रंथ 2. अर्ध-प्रामाणिक ग्रंथ 3. यह पूरा ग्रंथ वास्तव में जाली है। 4. सर्वथा शुद्ध इतिहासचूँकि रासो की घटनाएँ, राजाओं के नाम और संवत् (आनंद संवत्) तत्कालीन प्रामाणिक शिलालेखों और इतिहास से बिल्कुल मेल नहीं खाते, इसलिए शुक्ल जी ने इसे एक 'जाली ग्रंथ' ठहराया है। 14 / 2614. जगनिक कृत 'परमालरासो' (आल्हा-खंड) का केंद्र मुख्य रूप से बुंदेलखंड का कौन सा क्षेत्र माना जाता है, जहाँ इसके गाने वाले बहुत मिलते हैं? 1. जयपुर के आसपास 2. महोबा के आसपास 3. चित्तौड़गढ़ 4. ग्वालियरआल्हा और ऊदल महोबा के राजा परमाल (परमर्दिदेव) के वीर सामंत थे। अतः महोबा और संपूर्ण बुंदेलखंड 'आल्हा-खंड' का मुख्य गढ़ है। 15 / 2615. 'बीसलदेवरासो' में काव्य के अर्थ में किस शब्द का बार-बार प्रयोग आया है, जिससे शुक्ल जी के अनुसार 'रासो' शब्द की व्युत्पत्ति हुई है? 1. रसायण 2. रासक 3. रहस्य 4. रासशुक्ल जी का मत है कि ग्रंथ में बार-बार आए "नाल्ह रसायण आरंभइ" जैसे वाक्यों के 'रसायण' शब्द से ही बदलते-बदलते 'रासो' शब्द बना है। 16 / 2616. 'बीसलदेवरासो' के निर्माणकाल के संबंध में ग्रंथ में कौन सी प्रसिद्ध पंक्ति दी गई है, जिससे इसका समय वि.सं. 1212 (1155 ई.) निकलता है? 1. "बारह सै बहोत्तरा मँझारि, जेठ बदी नवमी बुधवारी" 2. "पुस्तक जल्हण हत्थ दै..." 3. "मनहुँ कला ससभान कला..." 4. "भल हुआ जु मारिया..."इस पंक्ति में 'बारह सै बहोत्तरा' का अर्थ शुक्ल जी ने वि.सं. 1212 लगाया है, जो कवि नरपति नाल्ह द्वारा इस ग्रंथ की रचना का वर्ष है। 17 / 2617. "यह घटनात्मक काव्य नहीं है, वर्णनात्मक है। इसमें दो ही घटनाएँ हैं- बीसलदेव का विवाह और उनका उड़ीसा जाना।" यह मत बीसलदेवरासो के संदर्भ में किस इतिहासकार का है? 1. डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी 2. कर्नल टॉड 3. आचार्य रामचंद्र शुक्ल 4. डॉ. बच्चन सिंहशुक्ल जी के अनुसार, इस छोटे से ग्रंथ में युद्धों या राजा के राजनीतिक जीवन की कोई बड़ी ऐतिहासिक घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह केवल एक श्रृंगारिक विरह गीतिकाव्य है। 18 / 2618. "यदि यह ग्रंथ (परमालरासो) साहित्यिक प्रबंधपद्धति पर लिखा गया होता तो कहीं न कहीं राजकीय पुस्तकालयों में इसकी कोई प्रति रक्षित मिलती। पर यह गाने के लिये ही रचा गया था..." यह मत किसका है?* 1. बाबू श्यामसुंदर दास 2. आचार्य रामचंद्र शुक्ल 3. हजारी प्रसाद द्विवेदी 4. कर्नल टॉडशुक्ल जी स्पष्ट करते हैं कि आल्हा लोककंठ में जीवित रहा, इसलिए समय के साथ इसकी भाषा और पाठ में बहुत से बदलाव आ गए और इसका मूल रूप सुरक्षित नहीं रह सका। 19 / 2619. शुक्ल जी के अनुसार, देशभाषा काव्य के अंतर्गत आने वाले आठ ग्रंथों की सही सूची कौन सी है? 1. खुमानरासो, बीसलदेवरासो, पृथ्वीराजरासो, जयचंद्रप्रकाश, जयमयंक जस चंद्रिका, कीर्तिलता, खुसरो की पहेलियाँ, विद्यापति पदावली 2. खुसरो की पहेलियाँ, विद्यापति पदावली, चंदनबाला रास, खुमानरासो, बीसलदेवरासो, पृथ्वीराजरासो, कीर्तिलता, परमालरासो, 3. खुमानरासो, बीसलदेवरासो, पृथ्वीराजरासो, जयचंद्रप्रकाश, जयमयंक जस चंद्रिका, परमालरासो, खुसरो की पहेलियाँ, विद्यापति पदावली 4. कीर्तिलता, कीर्तिपताका, हम्मीररासो, विजयपालरासो, जयचंद्रप्रकाश, जयमयंक जस चंद्रिका, परमालरासो, खुसरो की पहेलियाँ,ध्यान रहे कि इनमें से अंतिम दो (खुसरो और विद्यापति) और बीसलदेवरासो को छोड़कर शेष 5 ग्रंथ शुद्ध रूप से वीरगाथाएँ हैं। 20 / 2620. 'बीसलदेवरासो' कुल कितने खंडों में विभक्त है और इसकी कथा का मुख्य सार क्या है? 1. तीन खंड, युद्धों का वर्णन 2. चार खंड, बीसलदेव का राजमती से विवाह तथा बीसलदेव का रूठकर उड़ीसा जाना 3. पाँच खंड, धार्मिक उपदेश 4. दो खंड, पृथ्वीराज की वीरतायह चार खंडों का विरह-प्रधान काव्य है। खंड 2 में राजा का रूठकर उड़ीसा जाना और वहाँ 1 वर्ष रहना तथा खंड 3 में राजमती के विरह का बड़ा मार्मिक वर्णन है। 21 / 2621. 'पृथ्वीराजरासो' आकार की दृष्टि से कैसा ग्रंथ है? 1. यह ढाई हजार (2500) पृष्ठों का एक बहुत बड़ा ग्रंथ है जिसमें 69 सर्ग (समय) हैं। 2. यह केवल 100 पृष्ठों की छोटी सी पुस्तिका है। 3. यह केवल मुक्तक दोहों का संग्रह है। 4. यह गद्य में लिखी गई कहानी है।रासो एक विशाल महाकाव्य है। इसके अध्यायों को 'सर्ग' न कहकर 'समय' कहा गया है, और इसमें प्राचीन समय में प्रचलित प्रायः सभी छंदों का (विशेषकर छप्पय का) भरपूर प्रयोग हुआ है। 22 / 2622. चंदबरदाई के संबंध में कौन सा कथन असत्य है? 1. इनका और महाराज पृथ्वीराज का जन्म एक ही दिन हुआ था और दोनों ने एक ही दिन यह संसार छोड़ा। 2. ये महाराज पृथ्वीराज के केवल राजकवि थे, युद्धों में भाग नहीं लेते थे। 3. ये षड्भाषा, व्याकरण, काव्य, साहित्य, छंदशास्त्र और ज्योतिष आदि विधाओं में पारंगत थे। 4. इन्हें जालंधरी देवी का इष्ट था।चंदबरदाई केवल दरबारी कवि नहीं थे, बल्कि वे महाराज के साथ युद्ध, आखेट, सभा और यात्राओं में हमेशा साथ रहने वाले वीर सामंत और सखा भी थे। 23 / 2623. वीरगाथाकाल के "प्रशस्तिमूलक काव्य (वीरगाथाओं)" की दो मुख्य विशेषताएँ शुक्ल जी ने क्या बताई हैं? 1. प्रबंधकाव्य के रूप में और वीरगीतों (बैलेड्स) के रूप में 2. केवल गद्य महाकाव्य के रूप में 3. केवल नाटक और प्रहसन के रूप में 4. शांत रस और भक्ति रस के रूप मेंवीरगाथाएँ दो शैलियों में मिलती हैं- जैसे 'पृथ्वीराजरासो' एक विस्तृत प्रबंधकाव्य है, जबकि 'परमालरासो' (आल्हा) और 'बीसलदेवरासो' मुक्तक वीरगीत (बैलेड्स) के रूप में गाए जाते थे। 24 / 2624. शुक्ल जी ने प्रकरण 3 का नाम क्या रखा है और इसके अंतर्गत कितने ग्रंथों का विवेचन किया है? 1. अपभ्रंश काव्य, 4 ग्रंथ 2. देशभाषा काव्य / वीरगाथा, 8 ग्रंथ 3. फुटकल रचनाएँ, 2 ग्रंथ 4. रासो काव्य, 12 ग्रंथप्रकरण 3 का मुख्य विषय 'देशभाषा काव्य' है जिसे शुक्ल जी वीरगाथाकाल भी कहते हैं। इसके अंतर्गत वे बचे हुए 8 रासो और देशभाषा काव्यों का विस्तार से विवेचन करते हैं। 25 / 2625. गुप्त साम्राज्य के ध्वस्त होने और हर्षवर्धन की मृत्यु (संवत् 704) के उपरांत भारत का कौन सा भाग भारतीय सभ्यता और बलवैभव का केंद्र बना रहा, जहाँ की भाषा ही शिष्ट मान्य भाषा बन गई थी? 1. पूर्वी भाग (मगध) 2. पश्चिमी भाग (कन्नौज, अजमेर, अन्हिलवाड़ा आदि) 3. दक्षिणी भाग (महाराष्ट्र) 4. उत्तरी भाग (कश्मीर)कन्नौज और अजमेर जैसी बड़ी राजधानियाँ पश्चिमी भाग में थीं। यहाँ के राजाओं के दरबार में ही चारण संस्कृति फली-फूली और यहीं की भाषा साहित्य की मुख्य धारा बनी। 26 / 2626. प्रादेशिक बोलियों के साथ-साथ ब्रज या मध्यदेश की भाषा का आश्रय लेकर चारणों ने जो साहित्यिक भाषा विकसित की, उसे किस नाम से पुकारा जाता था? 1. पिंगल भाषा 2. डिंगल भाषा 3. अवहट्ट भाषा 4. सधुक्कड़ी भाषाजब अपभ्रंश के योग से शुद्ध राजस्थानी भाषा का साहित्यिक रूप बनता था तो वह 'डिंगल' कहलाती थी, परंतु जब ब्रजभाषा या मध्यदेश की भाषा का पुट मिलता था तो उसे 'पिंगल' कहा जाता था। नई प्रश्नोत्तरी के नोटिफिकेशन तथा परिणाम के लिए नीचे दिए गए फ़ॉर्म को भरें। कृपया आधिकारिक नाम तथा ई-मेल आईडी ही दर्ज करें। Your score isThe average score is 59% 0% Restart quiz You Might Also Like हिन्दी साहित्य अभ्यास प्रश्न शृंखला-1May 14, 2026 यूपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर जीडीसी हिन्दी प्रश्न-पत्र 2021May 12, 2026 यूपीपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर जीडीसी हिन्दी प्रश्न-पत्र 2013May 14, 2026Leave a Reply Cancel replyCommentEnter your name or username to commentEnter your email address to commentEnter your website URL (optional) Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ