आचार्य रामचन्‍द्र शुक्‍ल साहित्‍‍य‍ेतिहास प्रश्नोत्तरी सीरीज | आदिकाल (प्रकरण 2)

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आचार्य रामचन्‍द्र शुक्‍ल साहित्‍‍य‍ेतिहास प्रश्नोत्तरी सीरीज | आदिकाल (प्रकरण 2 - अपभ्रंश काव्‍य)

! महत्त्वपूर्ण  सूचना !

यह अभ्‍यास-पत्र हिन्‍दी साहित्‍येतिहास जगत के प्रमुख इतिहासकार आचार्य रामचन्‍द्र शुक्‍ल के ग्रंथ 'हिन्‍दी साहित्‍य इतिहास' पर आधारित है।

इस अभ्‍यास-पत्र को आगामी परीक्षाओं के अभ्‍यास के लिए यहॉं निशुल्‍क उपलब्‍ध करवाया जा रहा है।

आगे भी हिन्‍दी भाषा से संबंधित विभिन्‍न परीक्षाओं के पिछले वर्षों के प्रश्‍न-पत्र एवं अभ्‍यास प्रश्‍न उपलब्‍ध करवाऍं जाएँँगे, जिसकी सूचना अभ्‍यर्थी द्वारा दी गई ई-मेल आईडी पर मुहैया करवाई जाएगी । अत: आधिकारिक नाम तथा ई-मेल आईडी से ही इस प्रश्नोत्तरी में स‍म्मिलित हों।

हालांकि प्रश्‍न-पत्र तैयार करते समय बड़ी सावधानी बरती गई है तथा त्रुटि की गुंजाइश बहुत कम है, फिर भी अगर कोई त्रुटि हो तो वेबसाईट पर मौजूद आधिकारिक ई-मेल आईडी से अवगत करवाने का कष्‍ट करें।

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शुक्ल जी ने अपभ्रंश के सामान्य साहित्य (जो जैन, सिद्ध और नाथों से अलग था) की सामग्री का उल्लेख किन संग्रहकर्ताओं और रचयिताओं के क्रम से किया है?

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महाराष्ट्र के किस प्रसिद्ध संत ने खुद को गोरखनाथ की शिष्य परंपरा में स्वीकार किया है?

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शुक्‍ल जी के अनुसार, अपभ्रंश की रचनाओं की परंपरा लगभग किस कवि के काल में खत्‍म हो जाती है?

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निम्नलिखित में से जैन ग्रंथकार देवसेन के किस ग्रंथ का उल्लेख शुक्ल जी ने अपने इतिहास में किया है?

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महामहोपाध्याय पंडित हरप्रसाद शास्त्री को नेपाल के राजकीय पुस्तकालय में विद्यापति का कौन-सा ग्रंथ प्राप्त हुआ था?

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बौद्ध धर्म ने धीरे-धीरे तांत्रिक रूप धारण कर लिया था, तब उसमें पाँच ध्यानी बुद्धों और उनकी शक्तियों के अतिरिक्‍त किनकी कल्पना की गई जो सृष्टि का परिचालन करते हैं?

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"अपभ्रंश नाम पहले-पहल बलभी के राजा धारसेन द्वितीय के शिलालेख में मिलता है, जिसमें उसने अपने पिता गुहसेन को किन तीन भाषाओं का कवि कहा है?"

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किस संस्कृत नाटककार ने अपने प्रसिद्ध नाटक 'कर्पूरमंजरी' में 'भैरवानंद' के नाम से एक ऐसे ही सिद्ध योगी का समावेश किया है?

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शुक्ल जी के अनुसार, नाथ संप्रदाय के संदर्भ में जाति-पाँति के खंडन को लेकर क्या स्थिति थी?

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जैन कवि पुष्पदंत के किन ग्रंथों का उल्लेख शुक्ल जी ने अपने अपभ्रंश काव्य प्रकरण में किया है?

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शुक्ल जी ने सिद्धों और नाथों की रचनाओं को शुद्ध साहित्य के अंतर्गत न मानकर उन्हें क्या माना है?

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'हर्षचरित' में संस्कृत कवियों के साथ भाषा-कवियों का भी उल्लेख किसने किया है?

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निम्नलिखित में से किस व्याकरण ग्रंथाकार के 'प्राकृतप्रकाश' नामक ग्रंथ में अपभ्रंश का उल्लेख नहीं मिलता है?

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सिद्धों के 'महासुखवाद' के विपरीत नाथपंथ के प्रणेता गोरखनाथ ने किस आधार पर 'हठयोग' का प्रवर्तन किया?

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"सिद्धों ने किस भाषा-शैली का प्रयोग किया है, जो अंतःसाधनात्मक अनुभूतियों का संकेत करने वाली प्रतीकात्मक भाषा शैली है?"

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नाथों ने वज्रयानी सिद्धों के विरुद्ध किन विकृतियों के त्याग पर विशेष बल देते हुए ब्रह्मचर्य और शारीरिक-मानसिक शुचिता का संदेश दिया?

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अपभ्रंश नाम का इतिहास बताते हुए शुक्ल जी लिखते हैं कि किस आचार्य ने अपभ्रंश नाम न देकर उसे केवल 'देशभाषा' ही कहा है?

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पंजाब में नमक के पहाड़ों के बीच कौन सा स्थान नाथों के कारण बहुत प्रसिद्ध रहा, जिसका उल्लेख मलिक मोहम्मद जायसी के 'पद्मावत' में भी आया है?

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कबीर की 'साखी' की भाषा तो खड़ी बोली राजस्थानी मिश्रित सामान्य भाषा 'सधुक्कड़ी' है, पर उनके 'रमैनी' के पदों में काव्य की कौन सी भाषा दिखाई देती है?

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वज्रयान बौद्ध धर्म के विकृत रूप में, सिद्धि प्राप्ति के लिए, किन तत्वों का सेवन आवश्यक माना गया था जिसे योग या महामुद्रा कहते थे?

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योग संबंधी अंतर्मुखी साधना के कारण नाथों ने किस भाषा-शैली का प्रयोग किया था?

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नाथपंथी कानों की लौ में बड़े-बड़े छेद करके स्फटिक के भारी-भारी कुंडल पहनते हैं, इस कारण उन्हें समाज में क्या कहा जाता है?

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नाथ संप्रदाय के सिद्धांतों के अनुसार, वे दोनों कौन से तत्व हैं जिनके योग से वे जगत की उत्पत्ति मानते थे?

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शुक्ल जी के अनुसार, गोरखनाथ ने हिंदू-मुस्लिम दोनों के विद्वेषभाव को दूर करने के लिए कौन सा मार्ग निकाला था जो मुसलमानों के लिए भी आकर्षक था?

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पश्चिमी भाग में सक्रियता के कारण नाथों ने राजपूताना और पंजाब की भाषा को अपनाते हुए, मुस्लिमों को भी अपनी बानी सुनाने के लिए किस भाषा का समावेश किया?

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सिद्धों ने किस अवस्था का प्रवर्तन किया, जहाँ साधक 'शून्य' में इस प्रकार विलीन हो जाता है जैसे नमक में पानी?

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गोरखनाथ का नाथपंथ बौद्धों की किस शाखा से टूटकर या उससे निकलकर विकसित हुआ था?

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"जब से प्राकृत बोलचाल की भाषा न रह गई तभी से अपभ्रंश साहित्य का आविर्भाव समझना चाहिए।" यह कथन किस प्रकरण से उद्धृत है?

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शुक्ल जी के अनुसार, "काव्य-रचना के लिये भाषा, अपभ्रंश से देशभाषा की ओर उन्मुख हो रही थी।" इस संक्रमण काल में व्यापक काव्यभाषा (नागर अपभ्रंश) का ढाँचा किस क्षेत्र की भाषा का था?

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सिद्ध साहित्‍य के अंतर्गत किनके योग से महासुख दशा की प्राप्ति मानी गई है।

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"जनता पर सिद्धों का प्रभाव विक्रम की दसवीं शताब्दी से ही पाया जाता है, जो मुसलमानों के आने पर पठानों के समय तक कुछ बना रहा।" यह कथन किसका है?

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"कबीर आदि संतों को नाथपंथियों से जिस प्रकार 'साखी' और 'बानी' शब्द मिले, उसी प्रकार साखी और बानी के लिए बहुत कुछ सामग्री और कैसी भाषा भी मिली?"

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सिद्धों और नाथों के प्रभाव क्षेत्र के संबंध में भौगोलिक विभाजन क्या था?

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"सिद्ध सरहपा की उपदेश की भाषा तो पुरानी टकसाली हिंदी (देशभाषा मिश्रित अपभ्रंश) है, पर उनके गीतों की भाषा कौन सी है?"

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सिद्ध साहित्‍य में निर्वाण के तीन अवयव हैं-

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अपभ्रंश साहित्य में "चरित्रकाव्य या आख्यान काव्य" के लिए अधिकतर किस छंद पद्धति को अपनाया गया था, जो आगे चलकर सूफियों और तुलसीदास ने भी अपनाई?

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बौद्ध धर्म की किस शाखा से तांत्रिक योगियों को 'सिद्ध' कहा गया और इनकी संख्या कितनी मानी गई?

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शुक्ल जी ने, जैन, सिद्ध एवं नाथों का वर्णन आदिकाल के किस प्रकरण में किया है?

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बिहार के वे दो कौन-से प्रसिद्ध विद्यापीठ (अड्डे) थे जहाँ सिद्ध रहा करते थे और जिन्हें बख्तियार खिलजी द्वारा उजाड़े जाने पर वे तितर-बितर होकर भोट (तिब्बत) आदि देशों में चले गए?

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प्रथम सिद्ध 'सरहपा' बौद्ध धर्म की वज्रयान शाखा के भीतर किस मत या पंथ के प्रवर्तक माने जाते हैं, जो सहज जीवन पर बहुत बल देते थे?

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नाथों के अनुसार "घट में ही बुद्ध है" और "जोइ-जोइ पिंडे सोइ ब्रह्माण्डे" का क्या अर्थ है?

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This Post Has 2 Comments

  1. Avatar photo
    priya

    बहुत सुंदर और ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी, धन्यवाद

  2. Avatar photo
    Virendra

    बहुत ही बेहतरीन प्रश्नोतरी

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