दिल्ली दरबार दर्पण – भारतेन्दु हरिश्चंद | हिन्दी निबंध

सब राजाओं की मुलाक़ातों का हाल अलग-अलग लिखना आवश्यक नहीं, क्योंकि सबके साथ वही मामूली बातें हुईं। सब बड़े-बड़े.....

0 Comments

भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है – भारतेन्दु हरिश्चंद | हिन्दी निबंध

आज बड़े आनंद का दिन है कि छोटे-से नगर बलिया में हम इतने मनुष्यों को एक बड़े उत्साह से एक स्थान पर देखते हैं। इस अभागे......

0 Comments

हिन्दी साहित्य अकादमी पुरस्कार – 1955 से अब तक

हिन्‍दी साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्‍तकर्ता का विवरण- हिन्‍दी का प्रथम साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार 1955 में माखनलाल चतुर्वेदी को मिला था।

0 Comments

मेरे राम का मुकुट भीग रहा है – विद्या निवास मिश्र | हिन्दी निबंध

महीनों से मन बेहद-बेहद उदास है। उदासी की कोई ख़ास वजह नहीं, कुछ तबीयत ढीली, कुछ आसपास के तनाव और कुछ उनसे टूटने का डर...

0 Comments

उत्तराफाल्गुनी के आसपास – कुबेर नाथ राय | हिन्दी निबंध

वर्षा ऋतु की अंतिम नक्षत्र है उत्तराफाल्गुनी। हमारे जीवन में गदह-पचीसी सावन-मनभावन है, बड़ी मौज रहती है, परंतु सत्ताइसवें के आते-आते.....

0 Comments