गोशाला – रामवृक्ष बेनीपुरी | शब्दचित्र | रेखाचित्र
गोशाला - रामवृक्ष बेनीपुरी जी द्वारा लिखित एक शब्दचित्र है। जो 'गेहुँ और गुलाब' (1950) रेखाचित्र संग्रह में संकलित है।
गोशाला - रामवृक्ष बेनीपुरी जी द्वारा लिखित एक शब्दचित्र है। जो 'गेहुँ और गुलाब' (1950) रेखाचित्र संग्रह में संकलित है।
'रसिया बालम' जयशंकर प्रसाद द्वारा लिखित हिन्दी कहानी है, जिसका कथानक राजस्थान के सिरोही जिले में प्रचलित एक लोककथा पर आधारित है।
“आज सात दिन हो गए, पीने को कौन कहे? छुआ तक नहीं! आज सातवाँ दिन है, सरकार! ” “तुम झूठे हो। अभी तो तुम्हारे कपड़े से महक आ रही है।”
बाहर शोरगुल मचा। डोड़ी ने पुकारा— “कौन है?” कोई उत्तर नहीं मिला। आवाज़ आई—“हत्यारिन! तुझे कतल कर दूँगा!”
रात को बड़े जोर का अंधड़ चला। सेक्रेटेरिएट के लॉन में जामुन का एक पेड़ गिर पडा। सुबह जब माली ने देखा तो उसे मालूम हुआ कि.....
Parinde- अँधियारे गलियारे में चलते हुए लतिका ठिठक गई। दीवार का सहारा लेकर उसने लैंप की बत्ती बढ़ा दी। सीढ़ियों पर उसकी छाया एक बेडौल
Raja nirbansiya - ''एक राजा निरबंसिया थे”—माँ कहानी सुनाया करती थीं। उनके आसपास ही चार-पाँच बच्चे अपनी मुठ्ठियों में फूल दबाए कहानी समा
Pita - उसने अपने बिस्तरे का अंदाज़ लेने के लिए मात्र आध पल को बिजली जलाई। बिस्तरे फ़र्श पर बिछे हुए थे। उसकी स्त्री ने सोते-सोते ही बड़बड़ाया..
Inspector Matadeen Chand Par-वैज्ञानिक कहते हैं, चाँद पर जीवन नहीं है। सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर मातादीन (डिपार्टमेंट में एम. डी. साब)....
Sikka Badal Gaya Kahani- खद्दर की चादर ओढ़े, हाथ में माला लिए शाहनी जब दरिया के किनारे पहुँची तो पौ फट रही थी। दूर-दूर आसमान के पर्दे....