बसंती हवा – केदारनाथ अग्रवाल | हिन्दी कविता

बसंती हवा- केदारनाथ अग्रवाल की कविता- हवा हूँ, बड़ी बावली हूँ!.....बड़ी मस्तमौला, नहीं कुछ फ़िकर है,,,..बड़ी ही निडर हूँ, जिधर चाहती हूँ,....

0 Comments

बैठा हूँ इस केन किनारे – केदारनाथ अग्रवाल | हिन्दी कविता

दोनों हाथों में रेती है,...नीचे, अगल-बग़ल रेती है,...होड़ राज्य-श्री से लेती है.......मोद मुझे रेती देती है

0 Comments