चंदनवा चैती गाता है – केदारनाथ अग्रवाल | हिन्दी कविता
चंदनवा चैती गाता है- केदरानाथ अग्रवाल की कविता- घरवाली के साथ ओसाया,.. है समीर में।....दाने के ऊँचे पहाड़ को.... खड़ा किया है...
चंदनवा चैती गाता है- केदरानाथ अग्रवाल की कविता- घरवाली के साथ ओसाया,.. है समीर में।....दाने के ऊँचे पहाड़ को.... खड़ा किया है...
बसंती हवा- केदारनाथ अग्रवाल की कविता- हवा हूँ, बड़ी बावली हूँ!.....बड़ी मस्तमौला, नहीं कुछ फ़िकर है,,,..बड़ी ही निडर हूँ, जिधर चाहती हूँ,....
दोनों हाथों में रेती है,...नीचे, अगल-बग़ल रेती है,...होड़ राज्य-श्री से लेती है.......मोद मुझे रेती देती है
जल का जहाज़ जैसे पल-पल डोलता ........माँझी! न बजाओ बंशी मेरा प्रन टूटता......
फागुन की मस्ती के झोंके, .....दौड़े आते हैं उड़-उड़ के,...... अंगों में, बाहों में कस के,..............उसकी मति को मंद बनाने;
मलयानिल की परछाईं-सी,.....इस सूखे तट पर छिटक छहर!... कोमल चिर कंपन-सी......
उषा-सी आँखों में कितनी, मादकता भरी ललाई है।....... कहता दिगंत से मलय पवन...............है रात घूम आई मधुबन,......
Bhartendu Harishchand- हिंदी-गद्य साहित्य का सूत्रपात करने वाले चार महानुभाव कहे जाते हैं—मुंशी सदासुखलाल, इंशा अल्ला ख़ाँ, लल्लूलाल और सदल...
भक्ति रस का पूर्ण परिपाक जैसा तुलसीदासजी में देखा जाता है वैसा अन्यत्र नहीं। भक्ति में प्रेम के अतिरिक्त आलंबन के महत्त्व और ......
मनुष्य अपने भावों, विचारों और व्यापारों के लिए दिए दूसरों के भावों, विचारों और व्यापारों के साथ कहीं मिलता और कहीं लड़ाता हुआ...